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President (v/;{k)
 

Manish Kumar Shekhar
President

Akhil Bhartiya Bhumihar Brahmin Mahasangh

मनीष कुमार शेखर
अध्यक्ष

अखिल भारतीय भूमिहार ब्राह्राण महासंघ 

 

 

मनीष कुमार शेखर की कलम से

भूमिहार ब्राह्राण होने का अर्थ है, समाज के विकास की पूरी जिम्मेदारी लेकर चलना

अखिल भारतीय भूमिहार ब्राह्राण महासंघ की स्थापना भूमिहार ब्राह्राण एवं इसके समरुप अयाचक ब्राह्राणों के संगठित प्रतिभा के माध्यम से राष्ट्र का नव निर्माण करने के उद्देश्य से किया गया हैं। भूमिहार ब्राह्राण शुरु से ही समाज के विकास की पूरी जिम्मेदारी लेकर चलते आ रहे हैं। कृषि पर आधारित हमारी संरचना मे भूमिहार ब्राह्राणों की अग्रणी भूमिका के कारण गाँव के सभी जातियों के विकास की जिम्मेदारी कृषि कार्य के माध्यम से भूमिहार ब्राह्राणो के पर अधारित था, जिसमें सभी जातियो में आपसी प्रेम एवं सौहार्द का माहौल था।

विगत कई वर्षो से कृषि में लाभ के बजाये, भारी घाटा का कार्य हो गया है, जिससे अधिकांश भूमिहार ब्राह्राण अपने परम्परागत कृषि कार्य को छोङकर अन्य क्षेत्रों में सम्भावनायें तलाशने लगे हैं, जिसके कारण गाँव टूट गया है। आपसी प्रेम एवं सौहार्द की जगह ईर्ष्या एवं द्वेष ने जगह बना लिया है।

अखिल भारतीय भूमिहार ब्राह्राण महासंघ के माध्यम से भूमिहार ब्राह्रणों के संगठित ऊर्जा द्वारा फिर से समाज के विकास की धारा बहाने की तरफ कार्य करने का प्रयास किया जा रहा है। हम सभी का दायित्व है कि अपनी उन्नति के साथ-साथ समाज के सभी व्यक्तियों के विकास की योजना पर विचार करें। अगर आप उन्नति करते है और आपके आस-पास हिंसा और द्वेष का जन्म हो रहा है, तो आपके विकास के कोई मायने नही है। इसलिए विकास की ऐसी योजना जिसमें सभी को आगे बढने का समान अवसर प्राप्त हो, इस पर चिन्तन और कार्यान्वयन करने की आवश्कता है।

हम लोग समझते हैं कि विकास का माँडल गाँव के विकास पर अधारित हो, तो वह स्थायी एवं सबके लिए उपयोगी हो सकेगा। इसी सोच और विश्वास के साथ प्रत्येक गाँव में स्वामी सहजान्नद सरस्वती किसान सूचना केन्द्र खोलने का निर्णय लिया हैं। जिससे उन्नत एवं लाभकारी खेती के साथ-साथ ग्रामीण उधोग को बढावा दिया जा सके।

ग्लोबलाइजेशन के य़ुग में इतनी बङी श्रम पूँजी वाले भारत को जहाँ सबसे ज्यादा लाभ मिलना चाहिए, जिसके बल पर भारत अपने ग्रामीण कृषि एवं हस्त निर्मित उत्पादों को दुनिया के बजारों में पहुँचाकर भारी लाभ कमा सकता है। लेकिन इसके विपरीत भारत दुनिया के उत्पादो का बहुत बङा बजार बन गया है।

चोरों तरफ आधारभूत संरचनाओं का तेजी विकास हो रहा है, जिससे ग्रामीण एवं कृषि उत्पादों को सस्ते दरों पर खरीदकर पुन: महँगे दरों पर गाँव तक पहुँचाया जा रहा हैं। आधारभूत संरचनाओं का उपयोग ग्रामीण उत्पादों को व्यवसायिक तरीके से भारत के सभी क्षेत्रो एवं दूसरे देशों तक पहुँचाने में किया जा सकता है।

भारत के किसान मेहनती है, परन्तु उनके पास सूचना का अभाव है। जिन लोगों के पास सूचना है और विकास की दिशा देने में समर्थ है, उसमें से अधिकांश लोग अपने लाभ के लिए ही काम करना चाहते है।

अखिल भारतीय भूमिहार ब्राह्राण महासंघ विकास की सभी पहलुओं पर विचार कर रही है। शीघ्र ही सभी क्षेत्रों के विशेषज्ञों की एक टीम गठित की जायेगी, जिससे सभी के  लिए विकास की सम्भावनाओं पर विचार कर उसे कार्य रुप दिया जायेगा।   

 

   

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